
अपमान का घूंट तुम्हे ही पीना होगा
छेड़खानी को भी चुपचाप तुम्हे सहना होगा
फ़ब्तियों को सुनकर भी चुप तुम्हे रहना होगा
क्यूंकि प्रतिकार का परिणाम बुरा
तुम्हे ही भुगतना होगा,
क्यूंकि तुम लड़की हो, इसलिए-
तुम्हे तों यह सब सहना ही होगा
पर क्यों?
क्या लडकियां इंसान नही?
क्या उनका आत्म- सम्मान नही?
क्या उनके कोई अरमान नही?
क्या उन्हें सम्मान से जीने का -
कोई अधिकार नही?
और अगर ऐसा नही है तों-
फिर क्यों हैं यह बंदिशें -मजबूरियां
हम लड़कियों के साथ?
क्यों कोई नही रोकता उनके हाथ
जो करते हैं, ऐसा व्यवहार लड़कियों के साथ l
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