
यहाँ वहां बम फूट रहे
हो रहा रुदन-चीत्कार
आतंकवाद के दानव ने
मचा रखा है ,हाहाकार
कितनों की उजड़ गयी गोद
मिट गया कितनी मांगों का सिन्दूर
और जाने कितने ही हो गए
ममता की छांव से दूर,
यूँ निर्दोषों का रक्त बहा कर
आतंकवाद का विष फैला कर
यूँ लाशों के ढेर लगा कर
मानवता के ये हत्यारे-
आखिर क्या पा जाते हैं?
मात्र हठधर्म संतुष्टि हेतु-
वह क्यूँ इतना गिर जाते हैं?
वह क्यूँ इतना गिर जाते हैं?
हो रहा रुदन-चीत्कार
आतंकवाद के दानव ने
मचा रखा है ,हाहाकार
कितनों की उजड़ गयी गोद
मिट गया कितनी मांगों का सिन्दूर
और जाने कितने ही हो गए
ममता की छांव से दूर,
यूँ निर्दोषों का रक्त बहा कर
आतंकवाद का विष फैला कर
यूँ लाशों के ढेर लगा कर
मानवता के ये हत्यारे-
आखिर क्या पा जाते हैं?
मात्र हठधर्म संतुष्टि हेतु-
वह क्यूँ इतना गिर जाते हैं?
No comments:
Post a Comment